मंगलवार, 30 जून 2009

बरसात मे तन के साथ भीगा मन

दिल्ली की पहली बारिश, और बारिश मे भीगने की बचपन से बनी आदत से मजबूर रिमझिम फुहारों मे जम कर भीगाथोडी बरसात के पानी से भींगा, थोडी आंखों की नमी से भींगाथोड़ा मौसम की फुहारों से भींगा, थोड़ा पुरानी यादों के सफर से भींगा
तेरे बिना आई ये पहली बरसात ना जाने यादों के कितने पीटारों को खोल कर रख दियायाद है मुझे तेरा बरसात मे भींगना; बारिश की पहली फुहार के साथ अभि-अभि की रट लगाकर अभि को अभि की पूर्णता दे देनातेरे साथ बरसात की यादों का लंबा सिलसिला जुड़ा है और हर बरसात के साथ यादों का एक अनवरत श्रृंखला भी
आज दिल्ली मे मानसून की पहली फुहार थीतन तो थोड़ा ही भींगा पर मन पुरा भीग गयाऊपर से राजधानी पॉवर की मेहरबानी से बरसात आरम्भ होने के साथ 6 घंटों के लिए गायब हुई बिजली ने पानी से नही भींगने वालों को पसीने से जरुर भीगा दिया
ऊपर से सड़क पर जमा पानी और इसके बाद आरम्भ हुआ सड़क जाम ने राजधानी क्षेत्र की दुर्दशा को सामने ला कर रख दियारात मे 12 बजे बिजली आने पर थोडी राहत मिलीमन तो अब भी वैसे ही भीगा है पर तन से पसीने की चिपचिपाहट कम होने लगी हैअब मै भी भीगे मन के साथ तेरे सपने मे खोने की कोशिश करने के लिए जा रहा हूँ

2 comments:

Nisha 3 जुलाई 2009 को 9:08 pm  

sach me pyar kabhi bhulaye nahi bhula ja sakta; apke sachhe pyar ko mera naman

hallagulli 3 मार्च 2011 को 5:35 pm  

bhot mast likha hai sach mein.............

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